12 June, 2020

वाच्य

क्रिया के जिस रूप से किसी वाक्य में कर्ता, कर्म या भाव में किसी एक की प्रधानता का बोध होता है उसे वाच्य कहते है |

वाच्य के तीन भेद है
1. कर्तृवाच्य
2. कर्मवाच्य
3. भाववाच्य

1. कर्तृवाच्य - जिस वाक्य में कर्ता की प्रधानता होती है, अर्थात क्रिया का संबंध कर्ता से होता है, उसे कर्तृवाच्य कहते है |

जैसे -
राम पत्र लिखता है |
मीरा गाना गाती है |

2. कर्मवाच्य - जिस वाक्य में कर्म की प्रधानता होती है, अर्थात वाक्य की क्रिया का संबंध कर्म से होता है, उसे कर्मवाच्य कहते है |

जैसे -
नाई से बाल कटाए गए |
सीता के द्वारा खाना बनाया गया |
मुझसे भार नहीं उठाया जाता |

इस प्रकार के वाक्यों में 'से' अथवा 'द्वारा' का प्रयोग देखने को मिलता है |

3. भाववाच्य - जिस वाक्य में भाव की प्रधानता होती है, अर्थात वाक्य की क्रिया का संबंध कर्ता और कर्म से न होकर भाव से होता है, उसे भाववाच्य कहते है |

जैसे -
मुझसे जोर से नहीं बोला जाता |
उससे बैठा नहीं जाता |

कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य बनाना

कर्तृवाच्य के साथ विभक्ति चिह्न को हटा देते है और उसके स्थान पर 'से' या 'के द्वारा' लगा देते है | साथ ही कर्म के साथ लगी विभक्ति भी हटा देते है |

मुख्य क्रिया को सामान्य भूतकाल की क्रिया में बदला जाता है |

जैसे -
कर्तृवाच्य                      कर्मवाच्य
मैंने खाना बनाया |         मेरे द्वारा खाना बनाया गया |
राम पत्र लिखता है |        राम के द्वारा पत्र लिखा गया |


कर्मवाच्य से कर्तृवाच्य बनाना

इसमें 'से', 'के द्वारा' को हटा कर मुख्य क्रिया के साथ विभक्ति चिह्न को लगा देते है |
जैसे -
मोहित के द्वारा दवा खाई गई |
मोहित ने दवा खाई |

कर्तृवाच्य से भाववाच्य बनाना

मुख्य क्रिया को बदलकर सामान्य क्रिया किया जाता है तथा कर्तृवाच्य के साथ 'से' लगाया जाता है |

जैसे -

गीता नहीं उठती |       गीता से उठा नहीं जाता |
मैं ज़ोर से नहीं बोलता | मुझसे ज़ोर से नहीं बोला जाता |

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