॥ दशमहाविद्या: माँ शक्ति के दस स्वरूप ॥
हिंदू धर्म और तंत्र शास्त्र में 'दशमहाविद्या' माँ आदि पराशक्ति (माता पार्वती) के दस विशेष अवतारों को कहा जाता है। 'महाविद्या' शब्द संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है— 'महा' यानी महान और 'विद्या' यानी ज्ञान, प्रकटीकरण या बुद्धिमत्ता।
ये दस देवियाँ दिव्य माँ के दस अलग-अलग पहलुओं को दर्शाती हैं। इनमें माँ का स्वरूप रौद्र (डरावना) भी है और अत्यंत सौम्य (शांत व सुंदर) भी। ये हमारे भीतर सोई हुई आध्यात्मिक ऊर्जा को जगाने का मार्ग प्रशस्त करती हैं।
दशमहाविद्याओं का संक्षिप्त परिचय:
माँ काली: समय, परिवर्तन और विनाश की शक्ति; जो अहंकार का नाश करती हैं।
माँ तारा: संकटों से तारने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली मार्गदर्शक।
माँ त्रिपुर सुंदरी (षोडशी): तीनों लोकों में सबसे सुंदर, जो पूर्णता का प्रतीक हैं।
माँ भुवनेश्वरी: पूरे ब्रह्मांड की स्वामिनी और पालनकर्ता।
माँ भैरवी: उग्र और तेजस्वी ऊर्जा, जो बुराई का दमन करती हैं।
माँ छिन्नमस्ता: आत्म-नियंत्रण और इंद्रियों पर विजय का प्रतीक।
माँ धूमावती: वैराग्य और दुख के माध्यम से मिलने वाले ज्ञान की देवी।
माँ बगलामुखी: शत्रुओं की वाणी और बुद्धि को स्तंभित (रोकने) करने वाली।
माँ मातंगी: वाणी, कला और संगीत की देवी (इन्हें तांत्रिक सरस्वती भी कहा जाता है)।
माँ कमला: समृद्धि, सौभाग्य और ऐश्वर्य की देवी (इन्हें तांत्रिक लक्ष्मी कहा जाता है)।
Book - 10 Mahavidya - https://amzn.to/4dlz1uZ
Das Mahavidya Sadhana Rahasya - https://amzn.to/4rsGZGg

No comments:
Post a Comment