Showing posts with label जरा हट के. Show all posts
Showing posts with label जरा हट के. Show all posts

12 September, 2016

असफलता

असफलता क्यों है जरुरी

हम सभी एक सफल जिंदगी की कामना करते है और हमारा लक्ष्य जीवन में सफलता पाना होता है । परंतु आज मैं, आपसे असफलता पर चर्चा करना चाहता हूँ लेकिन मेरा मकसद ये नहीं की आप असफल हो बल्कि ये कि अगर आप असफल होते है तो क्या करें । बहुत सारे सफल व्यक्ति जो हमारे आदर्श होते है, हम सिर्फ उनकी सफलता को ही देखते है और उन्होंने इस सफलता को पाने में  कितनी बार असफलता का स्वाद चख़ा है हम वो जानना नहीं चाहते । 

असफल होने पर 


आप असफलता को किस तरह लेते है यह आप पर निर्भर करता है । असफल होने पर दो तरह से प्रतिक्रिया होती है -

1. इंसान निराश हो जाता है और अपनी किस्मत को दोष देता है और हार मान लेता है ।
या
2. असफलता से सीखकर, जहाँ कमी रह गयी हो उन कमियों को दूर कर दुबारा कोशिश करता है । 

हमें हमेशा असफलता से हार नहीं माननी चाहिए और हमें निराशावाद को छोड़ कर आशावादी बनना चाहिए । अगर आप आशावादी है तो आप जानेंगे कि असफलता क्यों है जरुरी-



असफलता क्यों है जरुरी

1. असफलता आपको मजबूत बनाती है । 

2. ये आपको आपकी कमियाँ बताती है । 

3. सफल लोग अपनी असफलता से ही सीखते है । 

4. ये आपकी एक बेहतरीन शिक्षक है । 

5. असफलता सफलता से कही ज्यादा महत्वपूर्ण है । असफलता ही सफलता का आधार है ।


इन बातों का भी रखें ध्यान 

1. जीवन में कठिनाइयाँ आती जाती रहती है ।

2. आशावादी बने ।

3. दूसरे की सफलता से खुद की तुलना न करें ।

4. खुद पर भरोसा रखें और अपने लक्ष्य पर ध्यान दें ।

5. असफलता को स्वीकार करें । यह जीवन का एक हिस्सा है । इससे जीवन समाप्त नहीं हो जाता, जीवन का आनंद लें ।

6. असफलता को सीढी बना कर सफलता हासिल की जा सकती है ।


इन्हें भी पढ़े -            10 झूठ जो लोग अक्सर बोलते है

                                एक नजर इन खेलो पर


अंत में, अगर आप अक्सर Amazon India से ऑनलाइन शॉपिंग करते है | तो आप नीचे दिए गए लिंक से भी कुछ खरीद सकते हैं -  https://amzn.to/3aVkZ2n
 

धन्यवाद 


09 September, 2016

गली क्रिकेट

बात करे क्रिकेट की तो लगभग सभी ने इस खेल को जरूर खेला होगा और समय मिलने पर आज भी शायद आप इसे खेलते होंगे लेकिन बचपन की बात ही कुछ और होती है । अगर आपके पास बड़ा मैदान है तो शायद आपने स्टैण्डर्ड क्रिकेट का लाभ उठाया होगा परंतु बहुत बार जगह की कमी के होने की वजह से बच्चे गलियों में, सोसाइटी में ही क्रिकेट खेलने लगते है । जो रोचक बात इसको स्टैण्डर्ड क्रिकेट से अलग बनाती है वो है इसके नियम । तो आइये आज हम गली क्रिकेट की ही बात करते है --  

क्रिकेट किट ( क्रिकेट का सामान )

1. बैट ( बल्ला ) - बल्ला है तो अच्छी बात है, नहीं तो किसी लकड़ी का फट्टा भी चलेगा ।

2. बॉल - प्लास्टिक की बॉल, कॉस्को की बॉल, और तो और कपड़े की बॉल से खेलते है बहुत कम जगह ही लेदर की बॉल से खेलते है । 

3. विकेट - किसी दीवार का पिलर, पत्थरों या ईटों का विकेट, कोई बाल्टी या दो पत्थर कुछ दूरी पर लगा लो अगर उनके बीच से बॉल चली जाये तो आउट । 

अंपायर - वो खिलाड़ी जो दोनों तरफ से सिर्फ बैटिंग करता है बॉलिंग और फील्डिंग नहीं । बाकी टाइम उसका काम सिर्फ अंपायरिंग करना होता है । हाँ जब वो बैटिंग कर रहा हो तो उस समय उसकी जगह अंपायरिंग बैटिंग टीम का कोई अन्य सदस्य करता है । 
या फिर अंपायर बैटिंग टीम का ही कोई सदस्य बनता है । और जो दोनों तरफ से खेलता है उसको कॉमन प्लेयर बोल देते है । 


नियम - 

नियमों की सूची तो गल्ली क्रिकेट में बहुत लम्बी है क्योंकि हर जगह अलग- अलग नियम चलते है फिर भी कुछ सामान्य नियम निम्न है  -

1. ट्राय बॉल - पहली फेंकी जाने वाली बॉल ट्राय बॉल होती है । 

2. वन टिप वन हैण्ड (One tip One Hand) - बल्ले से लगने के बाद बॉल एक टिप (टप्पा ) खा जाये और फिर फील्डर ने उसे एक हाथ से कैच कर लिया तो उसे वन टिप वन हैण्ड कहते है इससे बैट्समैन आउट हो जाता है । 

3. तेज बॉल फैंकने की नहीं होगी । 

4. तेज शॉट मारा और बॉल दूर चले गयी तो आउट और बॉल भी खुद बैट्समैन को लानी होगी । 

5. बॉल किसी स्पेशल एरिया, दीवार या नाली में गयी तो आउट होगा । 

6. बॉल किसी के घर पर चली जाए तो आउट होगा । 

7. आखिरी बचा बैट्समैन अकेला खेल सकता है । 

8. अगर बॉलर अधिक रन पीटा रहा है तो वो रिटायर या बेबी ओवर ।

9. लगातार तीन वाइट फैंकी तो ओवर डिसमिस हो जाता है । 

10. दीवार में डायरेक्ट बॉल लगी तो 6, और टप्पा खा कर लगी तो 4 रन होंगे । चौके और छक्के के अलग- अलग नियम भी हो सकते है । 
11.  जो मैच को बीच में छोड़ कर जायेगा, उसे अगले दिन नहीं खिलायेंगे । 


बेईमानियाँ -

अंपायर बैटिंग टीम का ही होता है तो बहुत बार चीटिंग हो जाती है । 

एल. पी. डब्लू, स्टंपिंग, रन आउट को नहीं मानना और कई बार तो रन आउट डिक्लेयर करने के लिए कोई बंदा रखना पड़ता है जो दोनों टीमों से नहीं खेल रहा हो । 

जिसका बल्ला बॉल उसकी चलेगी । वरना वो अपना बल्ला बॉल ले कर चल देता है । 

रनों में बेईमानी करना । अक्सर रन दूसरी टीम को याद नहीं रहते । तो लोग कम रन बना कर ज्यादा बता देते है और अगर दूसरी टीम का कोई सदस्य रन याद कर रहा हो तो लड़ाई हो जाती है । 


आशा करता हूँ  आपको इस लेख के द्वारा गली क्रिकेट के वे दिन याद जरूर आये होंगे और अगर आपके वहाँ कुछ अलग नियम चलते हो तो आप हमें कमैंट्स लिख कर जरूर बतायें । 

07 August, 2016

विश्वास या अन्धविश्वास

नमस्ते दोस्तों,
आज मैं आपके साथ विश्वास और अन्धविश्वास पर एक विचार साझा कर रहा हूँ इन दोनों के बीच एक पतली सी रेखा होती है जिससे फर्क करना नामुंकिन हो जाता है । फिर भी ये आप पर निर्भर करता है की आप इनमें से किसको विश्वास मानते है और किसको अन्धविश्वास । 

बिल्ली अगर रास्ता काट जाए 


बिल्ली का रास्ता काटना लोग बहुत अशुभ मानते है । जब बिल्ली रास्ता काट जाये तो लोग वही रुक जाते है और उस रास्ते से पहले किसी और के गुजरने का इंतज़ार करते है फिर उस रास्ते से गुजरते है । और अगर काली बिल्ली रास्ता काट जाये, फिर तो खेर नहीं । लोग अपना रास्ता ही बदल देते है या वापिस चले जाते है । मैं तो जब बचपन में बिल्ली रास्ता काट जाती थी और स्कूल जाने में देर हो रही होती थी तो उस रास्ते पर थूक कर आगे जाया करता था आखिर कब तक किसी और के रास्ते से गुजरने का इंतज़ार करता । 

छीक आ जाये 


आप कोई काम शुरू कर रहे है और कोई छीक दे, तो लोग इसको बड़ा अपशकुन मानते है । वो ये सोचते है अब तो हमारा काम बिगड़ गया । और कई बार यह कहा जाता है कि अगर  2 बार छीक दे तो सब ठीक हो जाता है । फिर तो लोगो को आपके दुबारा छीकने का इंतज़ार रहता है । और हाँ अगर आपको ज़ुखाम लगा हो तो इसमें आपकी क्या गलती ।

नजर उतारना 


    नींबू मिर्च लगाना 


अक्सर घरों में, दुकान में, गाड़ी में लोग मिर्च और नींबू लटका कर घूमते है । और यह मानते है कि इससे नजर नहीं लगती है, भूत-प्रेत, नकारात्मकता नहीं रहती तथा बुरी आत्माएँ नहीं आती है मान लीजिये आपने दुकान खोल रखी है फिर तो सब तरह के लोग अच्छी या बुरी आत्मा वाले आपके वहाँ आएंगे ही । 

    नजर न लग जाये


आपको नजर न लग जाये इसके लिए भी लोग कई तरह के उपाय करते है कई तरह के ताबीज़ पहनते है और अगर नजर लग गयी हो तो कई तरह के टोटके करते है हमारे यहाँ तो राई, मिर्च, और नमक मिलाकर सिर पर घुमाकर फिर उसको जला देते है । कहते है छोटे बच्चों को नजर जल्दी लगती है लोग अक्सर अपने छोटे बच्चों को नजर से बचाने के लिए काज़ल का काला टीका जरूर लगाते है । 

टोकना 


अक्सर जब आप घर से  निकल रहे हो और कोई आपको पीछे से  टोक दे तो इसको अशुभ माना जाता है और कई बार जब कोई घर से निकल रहा होता है तो उससे ये पूछने को लोग मना करते है कि "कहाँ जा रहे हो" हमारे वहाँ भी इसकी मनाही है कि "कहाँ जा रहे हो" अगर जानना ज्यादा जरुरी हो तो आप यह पूछ सकते हो कि कितनी दूर जा रहे हो ।  



दही खा कर घर से निकलना 


आप कोई नया काम कर रहे हो या आज आपकी लाइफ का कोई महत्वपूर्ण दिन हो तो दही खा कर घर से निकले आपका दिन शुभ होगा या आपका वह काम बन जायेगा । ऐसा लोग अक्सर कहते है अब यह सच है या नहीं ये तो भगवान ही जाने । और अगर आपका काम न बना तो आप किसको कोसोगे किस्मत को या दही को । 

काँच का टूटना 


ये तो आपने बहुत बार फिल्मों और नाटकों में देखा ही होगा कि कोई शीशा टूट जाता है या किसी फोटो का काँच टूट जाये तो उस इंसान की जान को खतरा होता है । अक्सर घरों में भी काँच टूटने  को अशुभ माना जाता है । 

टूटे शीशे में चेहरा देखना 


टूटे शीशे में चेहरा देखना अच्छा नहीं माना जाता । और कहा ये जाता है कि इससे इंसान का भाग्य उसका साथ नहीं देता मैं तो सलाह दूँगा नया ले आओ यार । 

रात को नाखून, दाढ़ी बनाना 


बहुत बार शाम ढलने के बाद नाख़ून काटने, दाढ़ी बनाने या बाल काटने को मना किया जाता है और इसको उस इंसान के लिए अशुभ भी माना जाता है । 

रात को झाड़ू लगाना 


रात को घरों में झाड़ू लगाने को प्रतिबंधित किया जाता है और कहा ये जाता है यह काम सुबह  और दिन के होते है इन्हें उसी समय ही करने चाहिए । रात को, शाम को झाड़ू लगाने से घर की लक्ष्मी चले जाती है ।  

घर के अंदर छाता खोलना 


बचपन में घर के अंदर छतरी खोलने को घर वाले मना करते थे और डांटते भी थे । इसको भी बहुत लोग अशुभ मानते है । वैसे मुझे लगता है यह मनाही इसलिए होती है क्योंकि खेल खेल में छतरी ख़राब न हो जाये या टूट न जाये । या फिर यह मूर्खता का प्रतीक न बन जाये की घर के अंदर छतरी खोल के बैठा है । 

1 रूपया बड़ा कर उपहार देना  


अकसर ये देखा जाता है कि लोग उपहार आदि में दिये जाने वाले पैसे को 1 रूपया बढ़ा कर देते है जैसे की 101, 251, 501, 551, 1001 रूपया आदि । और शायद लोग ऐसा करना शुभ भी मानते है । एक दिलचस्प बात ये भी है की पैसे देते समय तो लोग 1 रुपया बढ़ा कर देते है और ज्यादातर कम्पनियाँ 1 रूपया घटा कर सामान बेचा करती है । 

अंत में बस यही कहूँगा कि अगर आप इनमें से कोई काम अपने विश्वास से कर रहे है तो करे । मेरा मकसद आपके विश्वास को तोडना नहीं है इसलिए मैंने इसका शीर्षक विश्वास या अंधविश्वास रखा ना कि सिर्फ अंधविश्वास । और ये भी बता दूँ इनमें से कई काम मैं नहीं करता और कुछ को मुझे मानना पड़ता है । इससे यही निष्कर्ष निकलता है कि ये आप पर निर्भर करता है कि आप किसे विश्वास माने और किसे अंधविश्वास । कमेंट लिख कर हमें भी जरूर बताये । 
धन्यवाद 
आपके कमेंट का इंतज़ार रहेगा  


29 July, 2016

कैसे कैसे झूठ


नमस्ते दोस्तों,
                  इस लेख को पढ़ने से पहले मैं ये बता दूँ ये जरुरी नहीं की आपने ये झूठ बोले ही होंगे या आप सच नहीं बोलते । ये शीर्षक उन झूठो पर है जो अक्सर इंसान बोल जाता है और शायद आप इनको झूठ मानने से भी इनकार कर दे । तो आईये शुरू करते है 

10 झूठ जो अक्सर लोग बोलते है 


1. पहला झूठ तो एक जग जाहिर झूठ है और शायद अभी तक आपने पहचान भी लिया हो । और वो ये है कि मैं कभी झूठ नहीं बोलता । अक्सर इन्सान इस बात की गवाही देता रहता है कि वह झूठ नहीं बोलता । हो सकता है वह सच बोल रहा हो पर ऐसे व्यक्ति गिने चुने ही होते है जिन्होंने कभी झूठ न बोला हो । 

झूठ समय को लेकर 


हम अक्सर समय को लेकर झूठ बोलते रहते है और शायद समय का अंतराल अलग-अलग हो सकता है 

2. बस 5 मिनट और- याद आया आपको, ये डायलॉग आपने कहाँ सुना । जी हाँ बचपन में आपने ही शायद ये डायलॉग डिलीवरी की हो । मैंने तो इसका भरपूर इस्तेमाल किया । जब बचपन में घर वाले सुबह जगाते थे तो मैं हमेशा यही कहता था और इस तरह एक से डेढ़ घण्टे की नींद और निकाल लेता था । सिर्फ बचपन में ही नहीं, अन्य जगह भी ये डायलॉग बोला जाता है जैसे 5 मिनट में चलते है, या 5 मिनट में तैयार होकर आता हूँ  । 

3. बस 10 मिनट- बस 10 मिनट में  पहुँच रहा हूँ आपको कही जाना है जहाँ आपको पहुँचने में देर हो गई या आप अभी घर से निकले ही नहीं हैं और अचानक आपका फ़ोन बज जाता है तो आप क्या बोलेंगें, ये आप ख़ुद ही यह विचार कर ले । और अंत में आप वहाँ 2-3 घण्टे बाद पहुँचते है ।  

4. समय ही नहीं मिलता-  हो सकता है आप सच में बहुत व्यस्त जिंदगी जी रहे है पर ये सच नहीं आपको समय नहीं मिलता । मान लीजिए आप कुछ नया सीखने की कब से सोच कर रहे लेकिन समय की वजह से कर नहीं पा रहे है । याद रखे कोई भी काम आपकी इच्छा शक्ति पर निर्भर करता है न की समय पर । और इच्छा शक्ति हो तो समय ख़ुद-ब-खुद निकल आता है । 



5. पैसे नहीं है- यह झूठ अलग-अलग अवसरों पर, अलग-अलग लोगो से बोला जाता है पैसे तो इंसान के पास होते है पर शायद मांगने वाला व्यक्ति भरोसे के लायक नहीं है या फिर उसने पिछला उधार नहीं चुकाया है । ये भी हो सकता है आप चाहते हो की वो पैसे खर्च करे । 

6. कैसा लग रहा हूँ मैं- जब ये सवालः पूछा जाता है तो अक्सर झूठ बोलना ही पड़ता है और हाँ यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपको सामने वाले से कितना लगाव है या आप उसको हर्ट नहीं करना चाहते । मान लिजिये आपका मित्र शॉपिंग करके आया है और आपसे पूछता है, ये कपडे मुझ पर कैसे लग रहे है तब बोलना ही पड़ता है अच्छे लग रहे है । ख़राब बोलने का तो सवाल ही नहीं उठता । और अगर बोल दिया ठीक है, तो याद रखे आप पर सवालों की बौछार होने वाली है  । 

खुद से बोले जाने वाले झूठ 


7. मुझे झूठ से सख्त नफरत है- जी हाँ ये सच है लोगो को झूठ से सख्त नफरत होती है और उन्हें किसी के झूठ बोलने पर गुस्सा भी बहुत आता है । लेकिन अक्सर हमको दुसरो के झूठ बोलने से नफरत होती है अपने झूठ बोलने से नहीं । 

8. मुझसे नहीं हो सकता- किसी काम को शुरू करने से पहले ही हार मान लेना, ये आपके दिमाग के द्वारा आपसे बोला गया सबसे बड़ा झूठ होता है अक्सर दिमाग किसी काम को करने से पहले ही ना नुकुर करने लगता है और आप उस काम को करने की कोशिश तक नहीं करते । हाँ ये जरूर है की दुनिया के सारे काम आप नहीं कर सकते । पर कोशिश न करना भी ठीक नहीं । 

9. जान कर भी अन्ज़ान बनना - कही बार कुछ बातें हमको पहले से पता चल जाती है और बाद में हमको कोई ये बातें बताता है तो अक्सर लोग कहते है अच्छा मुझे तो पता ही नहीं था, कब हुआ, कैसे हुआ, अच्छा हुआ तुमने बता दिया, नहीं तो मुझे तो पता ही नहीं चलता । 

10. झूठी तारीफ करना - क्या गाते हो यार, मस्त लग रहे हो......... झूठी तारीफ करने की बहुत सारी वजह हो सकती है और कई बार तो दूसरे को चढ़ाने के लिए भी झूठी तारीफो का सहारा लोग लेते है और बाद में हँसी उड़ाते है । और कई बार अपना काम निकलने के लिए भी लोग झूठी तारीफों का सराहा लेते है । 

अंत में झूठ तो कई तरह के बोले जाते है पर यहाँ पर मैंने व्यहारिक झूठो पर चर्चा की है । फिर भी ये बोलूंगा झूठ बोलना अच्छी बात नहीं है अतः सच बोलना शुरू करे, परन्तु कटु सत्य बोलने से भी थोड़ा परहेज करे । या फिर आप मेरी तरह कभी झूठ न बोले । क्योंकि मैं कभी झूठ नहीं बोलता । 

आशा करता हूँ आपको मेरा ये लेख जरूर पसंद आया होगा और आप अपनी राय मुझको कमेंट करके जरूर बताएंगे । साथ ही कोई व्यहारिक झूठ रह गया हो तो आप मुझको जरूर बताये । 


अंत में, अगर आप अक्सर Amazon India से ऑनलाइन शॉपिंग करते है | तो आप नीचे दिए गए लिंक से भी कुछ खरीद सकते हैं -  https://amzn.to/3aVkZ2n

धन्यवाद 




26 July, 2016

एक नजर इन खेलो पर

नमस्ते दोस्तों, 
               आज मैं आपसे बात कर रहा हूँ उन कुछ खेलों की, जिन्हें आपने शायद जरूर खेला होगा | शायद आप उन्हें अभी भी खेलते होंगे, पर अगर छोड़ दिया है तो इस ब्लॉग को पूरा पढे आपको वे खेल और उनसे जुड़ी यादें याद आ जाएँगी | आज मैं जिन खेलो की बात कर रहा हूँ वो हैं - कैरम और लूडो । आईये सबसे पहले बात करते हैं कैरम की 

कैरम (Carrom) :


कैरम एक 19  गोठियों (कॉइन्स)  का खेल है जिसमे 9 काली, 9 सफ़ेद या पीली, 1 लाल क्वीन (रानी ) और 1 स्ट्राइकर होता है | इस गेम को आप 4 खिलाड़ियों, 3 खिलाड़ियों, 2 खिलाड़ियों के साथ खेलते है लेकिन अगर आप अकेले है तो आप इसको अकेले भी खेल लेते है याद है  जब गोठियों को पॉकेट करने की कोशिश करते थे या रिवाइंड की प्रैक्टिस किया करते थे | वैसे तो ये गेम अलग- अलग तरीकों से खेला जा सकता है पर सामान्यतः 2 प्रकार के गेम हैं -
  1. 29 अंको वाला (29 Point Game)
  2. रूपया-पैसा (The Money Game)
नोट : गेम को स्टार्ट करने के लिए याद है सबसे पहले क्या किया करते है - ड्यू, जिसमे आपको स्ट्राइकर को रिवाइंड करके पॉकेट में डालना पड़ता है जो पहले ड्यू कर लेता है वही गेम को स्टार्ट करता है । 

29 अंको वाला / काली सफेद (29 Point Game)


कही-कही यह गेम 21 पॉइंट वाला भी होता है | इस खेल में  ड्यू के विजेता को पहले चान्स मिलता है और 2 टीमें होती हैं जो गेम स्टार्ट करता है उसकी सफेद गोठिया होती है और दूसरे की काली कॉइन्स | अगर 4 खिलाडी है तो 2-2 की टीम बन जाती है जिसमे पहला और तीसरा एक टीम में और दूसरा और चौथा दूसरी में । जो टीम सबसे पहले अपनी 9 कॉइन्स और क्वीन को विथ कन्फर्म, पॉकेट कर लेता है वो उस राउंड में जीतता है । क्वीन के 5 पॉइंट मिलते है और दूसरी टीम की जिनती कॉइन्स बच गयी है उनमे हर एक के, एक पॉइंट मिलते है | अगर क्वीन दूसरी टीम ने कन्फर्म की है तो उसके पॉइंट नहीं मिलते |  इस तरह जो पहले 29 पॉइंट बना लेता है वो गेम जीत जाता है, और हाँ 25 पॉइंट्स के बाद क्वीन के पॉइंट काउंट नहीं होते | 


कुछ नियम 


  • गेम के बीच में ड्यू होने पर अपको एक कॉइन दण्ड के रूप में सेन्टर में रखना पड़ता है । 
  • दूसरे की कॉइन पर डायरेक्ट हिट करने पर फाइन भरना पड़ता है, और एक कॉइन रखना पड़ता है । 
  • चेप होने पर आप जरूर दूसरे की कॉइन पर हिट कर सकते है पर उसके बाद वह आपकी कॉइन पर टच होनी चाहिए । 
  • आप बंद कॉइन को डायरेक्ट हिट नहीं कर सकते । 
  • क्वीन कवर एक ही पॉकेट पर नहीं किया जा सकता । 


रूपया-पैसा (The Money Game)


क़्योंकि इस खेल का नाम ही रूपया-पैसा है तो इस गेम में क्वीन के 50 रुपये / पॉइंट होते है, सफेद कॉइन के 20 पॉइंट, काली कॉइन के 10 पॉइंट होते है | इस गेम में आप कोई भी कॉइन (काली या सफेद) पॉकेट कर सकते है क्वीन को पॉकेट करने के बाद कन्फर्म करना जरुरी होता है और बहुत जगह सिंगल पॉकेट में कन्फर्म नहीं माना जाता है । खेल के अंत में खिलाड़ी अपने-अपने पैसे को गिनते है और जिसके पास कम पैसा होता है उतनी मनी से गेम फिर से स्टार्ट हो जाता है और तब तक चलता है जब तक एक टीम कंगाल न हो जाये | 


लूडो (Ludo):


पासों का खेल तो महाभारत काल से प्रसिद्ध है | लेकिन लूडो के अंदर 2 खेल आते है 
  1. लूडो 
  2. साँप सीढ़ी 

लूडो (Ludo):


लूडो में 4 रंगों से बना एक वर्ग जो लाल, हरा, नीला. पीला रंग का होता है प्रत्येक रंग की 4 कॉइन्स होती है और एक पासा होता है जो सफेद रंग का, जिसमे काले बिन्दु 1 से 6 तक बने होते हैं । इस गेम को भी आप 4 खिलाड़ियों, 3 खिलाड़ियों, 2 खिलाड़ियों के साथ खेल सकते है । कॉइन्स अपने रंग के घर/जेल पर रहती है पासे पर 6 आने पर ही वे अपने घर/जेल से निकल/आजाद हो सकती है गेम का उद्देश्य अपने सभी कॉइन्स को मंज़िल पर पहुँचाना होता है जो पहले पहुँचा देता है वो विजेता बन जाता है फिर दूसरे या तीसरे पोजीशन के लिए खेल जारी रखा जा सकता है  । 


कुछ नियम 


  • पाँसे पर 6 आने पर, आपको एक और बार पासा फैकने का मौका मिलता है । 
  • लगातार तीन बार 6 आ जाये तो आपका वह दाव माना नहीं जाता और पासा फैकने का मौका अगले को मिलता है । 
  • कही-कही 1 आने पर भी आप कॉइन खोल सकते है  और आपको दूसरा मौका भी मिलता है । 
  • अगर आप दूसरे की कॉइन की पोजीशन पर पहुँच जाए तो वह फिर से अपने घर / जेल में पहुँच जाते है । 
  • याद रखे बीच बीच में स्टॉप पॉइंट भी होते है जहाँ ऊपर लिखा नियम काम नहीं करता । 


 साँप सीढ़ी (Snake and Ladder):


साँप सीढ़ी का खेल हमारे जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव का ही एक रूप है जिस प्रकार जिंदगी के सफर में उतार-चढ़ाव आते है उसी प्रकार साँप सीढ़ी के खेल में । बावोजूद इसके खेल तो चलता रहता है । इस खेल में 1 से 100 तक की गिनती होती है और जगह-जगह पर साँप और सीढ़ी होते है जब आपकी कॉइन साँप पर पहुँचती है तो साँप आपको निगल जाता है और आप साँप की पुंछ पर पहुँच जाते है और जब आपको सीढ़ी मिलती है तो आप सीढ़ी चढ़कर शिखर पर पहुँच जाते है पाँसे में 6 का अंक आने पर ही आप गेम शुरू कर सकते है आपको 101 वीं  या 100 वीं पोजीशन  पर पहुँचना होता है तभी आप गेम जीत सकते है । मुझे हमेशा 99 पर साँप काट लेता था । 



आशा करता हूँ आपको मेरा यह लेख पसंद आया होगा और आपकी कुछ इन खेलो की यादें ताज़ा हुई होँगी । मैं आशा करता हूँ आप समय निकाल कर इन खेलो को फिर से जरूर खेलेंगें । अगर इन खेलो को लेकर कोई नियम या बात मुझसे छूट गयी हो तो मुझे जरूर कमेंट करें या आप इन खेलों को अन्य तरीकों से खेलते है तो वो भी जरूर साझा करें । 

धन्यवाद 
आपके कमेंट का इंतज़ार रहेगा